आज के समय में पेट्रोल और डीजल लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कामकाजी लोग हों या छोटे व्यापारी, सभी को रोजाना वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधा असर आम जनता की जेब पर डालती हैं। पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन हाल में कर संरचना में बदलाव के बाद अब थोड़ी राहत की उम्मीद नजर आ रही है।
दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के रेट
देश की राजधानी दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मिल रहा है। दिल्ली में वैट कम होने के कारण यहां बाकी राज्यों की तुलना में ईंधन सस्ता है। हालांकि, यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजार के रेट बढ़ने पर बदल सकती है क्योंकि भारत में कीमतें वैश्विक बाजार पर निर्भर करती हैं।
मुंबई में महंगाई का असर
वित्तीय राजधानी मुंबई में पेट्रोल-डीजल सबसे महंगा है। यहां पेट्रोल ₹103.50 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर मिल रहा है। राज्य सरकार के अतिरिक्त कर और वैट के कारण मुंबई के लोगों को दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है, जिससे वहां का घरेलू बजट बिगड़ जाता है।
राज्यों में अलग-अलग रेट
दिल्ली और मुंबई के अलावा चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे शहरों में भी ईंधन की दरें अलग-अलग हैं। हर राज्य अपनी कर नीति के आधार पर वैट लगाता है। इसी कारण एक ही देश में अलग-अलग राज्यों में कीमतों में इतना फर्क देखने को मिलता है।
CNG: सस्ता और प्रदूषण रहित ईंधन
पेट्रोल-डीजल की तुलना में CNG सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। दिल्ली में CNG ₹76.52 प्रति किलो, मुंबई में ₹77.00 और हरियाणा में ₹84.65 प्रति किलो मिल रही है। CNG के उपयोग से खर्च कम होता है और प्रदूषण भी घटता है। यही वजह है कि लोग अब CNG वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
कीमतों में बदलाव की वजहें
भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट मुख्य रूप से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर आधारित होते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, परिवहन लागत, कर और डीलरों का कमीशन भी इसमें बड़ा रोल निभाते हैं। इन सभी कारणों से भारत में ईंधन की कीमतें रोजाना बदलती रहती हैं।
भविष्य में राहत की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में और राहत मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। सरकार की कोशिश है कि महंगाई को नियंत्रित किया जाए और आम जनता को जरूरी चीजें सस्ती मिलती रहें।